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महिलासभा ने जलाया बलात्कारी सिस्टम का पुतला! पुलिस द्वारा बलात्कारी का पुतला छीना गया, माहौल हुआ गर्म

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छत्तीसगढ़ / जगदलपुर । राजधानी रायपुर के माना स्थित बालिका आश्रम में 14 वर्ष की बालिका ने साथ अनाचार की घटना सामने आई है। प्रसिद्व समाचार पत्र में प्रकाशित ख़बर के अनुसार बालिका आश्रम में रहने वाली 14 वर्षीय बालिका के साथ लगातार अनाचार होता रहा, जिसके बाद वह गर्भवती भी हो गई, बाद में उसने एक मृत बच्चे को जन्म दिया। इस संपूर्ण घटना को अधिकारी और कर्मचारियों ने दबाये रखा। 2021 से बालिका का शोषण होते रहा और आश्रम के अधिकारी कर्मचारियों ने मिलकर इस पूरे मामले को दबाये रखा यह उनके अपने जिम्मेदारी में लापरवाही के साथ ही पूर्णतः असंवेदनशील होने का प्रमाण प्रस्तुत करता है।

इसी तरह बस्तर ज़िलें के कस्तूरबा बालिका आश्रम की एक बालिका 3 तीनो से गायब है। परिजनों को इस बात की खबर लगते ही वे ताक़रागुड़ा बालिका आश्रम पहुंचे पर अब तक बालिका की कोई खबर नही हैंम अब एक बालिका कैसे आश्रम से ग़ायब हो गई इसकी जानकारी आश्रम के अधिकारी कर्मचारियों के पास नही है। पूर्व में भी जगदलपुर के कमला नेहरू बालिका आश्रम की अधीक्षिका द्वारा बालिकाओं से घर का काम करवाने व पैसों की उगाही के आरोप लगे थे। लेकिन प्रशासन उस समय भी आंख मूंदे बैठी रही। दरअसल जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा के साथ निभाते नही हैं। जिस कारण अधीनस्थ विभाग भगवान भरोसे चलते रहता है, और इसी कारण आये दिन कोई ना कोई घटना घटते रहती है।

छत्तीसगढ़ राज्य 23वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और यहां की बच्चियां आज भी असुरक्षित हैं। हालात ऐसे हो गए हैकि अब तो बच्चियों के मांस अधिकारी कर्मचारियों द्वारा नोंच कर खाया जा रहा है। ये अधिकारी कर्मचारी किसी राक्षस के समान हैं, जो जिंदा लोगों का मांस खाते हैं। जनसभा की महिला इकाई महिलासभा द्वारा ऊक्त दोनों मामलों को गंभीरता से लेते हुए आज जगदलपुर के गुरुगोविंद सिंह तिराहा पर गैर जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों का पुतला जलाकर विरोध दर्ज़ किया गया है। महिला सभा की प्रदेश प्रभारी रीता वाधवा के साथ, सैकड़ो महिलाएं इस विरोध प्रदर्शन में शामिल रही।

महिलासभा के कार्यक्रम को जनसभा के अध्यक्ष अरुण पाण्डेय् ने अपना समर्थन देते हुए राज्य के मुख्यमंत्री से निवेदन किया हैकि ज़िलें के प्रशासनिक अमले की लगाम उन्हें डायरेक्ट अपने हाथों में ले लेनी चाहिए। प्रशासन की कुर्सी पर बैठे लोग स्वयं को मालिक समझने की गलती कर रहे हैं, आम जनता को वे सभ्यता से पेश भी नही आते हैं। अगर प्रशासन के आला अधिकारी अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाएंगे तब जमीनी स्तर पर सभी विभाग के काम दुरुस्त हो जाएंगे। परंतु ढीलधल रवैय्या अपनाया जाता है, जोकि लोकतंत्र में टिक संकेत नही हैं।

बलात्कारी का पुतला जलाया जा रहा था जिसे पुलिस वालों ने छीन कर पानी डाल दिया जिस पर जनसभा के अध्यक्ष वही धरना पर बैठ गए व पुलिस पर बलात्कारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।

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