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समग्र अग्रवाल समाज के लोगों ने अग्रवाल सभा रायपुर के तत्वाधान में आक्रोश रैली निकालकर एसपी को ज्ञापन सौंपा

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रायपुर शहर, नशे की गिरफ्त में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, यदि इस पर अभी रोक नहीं लगी तो समझ कर चलिए कि, कहीं आपका कोई अपना भी तो इस नशे की गिरफ्त में नहीं आ गया है।

नशे के खिलाड़ी, स्कूल कॉलेज के आसपास की जगह को चुनते हैं,वहां अपना अड्डा बनाते हैं मासूम एवं संपन्न परिवारों के बच्चों को अपना निशाना बनाकर धीरे-धीरे उन्हें नशे की गिरफ्त में ले नशे का आदी कर देते हैं।

नशे की जरूरत पड़ने पर वह मासूम, जब उनसे उधारी ले लेता है तो, उस पर मनमाना ब्याज चढ़ाकर धमका कर वसूली की जाती है। उनकी पूरी गिरफ्त में आने का यही उनका एक माध्यम है।

रायपुर समता कॉलोनी निवासी 19 वर्षीय प्रियांशु सांवरिया के साथ भी यही हुआ, उनके परिजनों ने स्वीकार किया कि, उसने कभी बताया नहीं कि, उसे किसी का पैसा देना है, परंतु दुर्घटना होने के बाद उसके एक दोस्त ने बताया की अपराधियों से उसने ₹1500 उधारी लिया था, जिसके बदले में 2 दिन पहले ही 16 सो रुपए लौटा दिया गया था, परंतु दादागिरी गुंडागर्दी करने वालों को यह कहां मंजूर था कि, कोई बच्चा उनकी गिरफ्त से बाहर चले जाए इसलिए वे उससे ₹2000 की और डिमांड कर रहे थे, बच्चे को इस प्रकार दबाव में ₹2000 देना मंजूर नहीं था, उसके ना कर देने पर, उसे पहले तो धमकाया गया और कुछ घंटों बाद उसे कैची मारकर उसका मर्डर कर दिया गया, यह जानबूझकर सोच समझकर मर्डर करने की नियत से ही किया गया वार है।

प्रियांशु की जगह हमारा कोई अपना भी इनके गिरफ्त में आ सकता है इसलिए हम सबको मिलजुल कर इस नशे के खिलाफ जोर शोर से आवाज उठानी पड़ेगी, जहां-जहां स्कूल कॉलेज या इस प्रकार के शैक्षणिक गतिविधियां संचालित हैं वहां, पान ठेला, रेस्त्रां, कैफे इत्यादि पर प्रशासन कड़ी निगाह रखें और अपराधिक तत्वों के जमावड़े पर रोक लगाए, कढ़ाई से ही इसका निदान संभव है।

राजधानी का समग्र अग्रवाल समाज इस घटना से उद्वेलित है और प्रशासन को जगाने के लिए एक आक्रोश रैली के माध्यम से, ऐसे तत्वों के खिलाफ फास्टट्रैक में मुकदमा चलाए जाने की मांग के साथ, आज प्रातः 11:00 अग्रवाल समाज के 400 500 लोगों ने पुलिस अधीक्षक महोदय से मुलाकात कर अपना ज्ञापन सौंपा ।

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