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पाखंडी कालीचरण को संत कहना, लिखना संत समाज का अपमान -मोहन मरकाम

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रायपुर/। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में अशिष्ट बात कहने के बाद ही स्पष्ट हो गया था कि कालीचरण कोई संत महात्मा नहीं है, वह बहुरूपिया पाखंडी है। वह भगवा को फैशन के लिये धारण करता है। काली चरण खुद भी मान रहा कि वो कोई संत नही है। उसने खुद कहा है कि वह जिस भेष भूषा को धारण किये रहता है वह संतो का भेष नही। फैशन की वजह से वह दाढ़ी-बाल रखता है लाल साड़ी को धोती ओढ़नी की तरह पहनता है। उसके इस स्वीकारोक्ति के बाद भी आरएसएस भाजपा अपने हिडन एजेंडा के तहत वैमनस्ता फैलाकर उस कालीचरण के लिये महराज, साधु, संत जैसे शब्दों का उपयोग कर समाज का अपमान है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि समाचार माध्यमो के सम्मानित पत्रकार साथियो, समाज के प्रबुद्ध जनों, सोशल मीडिया में भी इस पाखंडी के लिए संत जैसे शब्दों के उपयोग नही करने का आग्रह करता हूं। इस पाखंडी के द्वारा बापू के अपमान के बाद दिखाई गई हेकड़ी इसके बेशर्मी और मानसिक विकृति का उदाहरण है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा इस दुष्ट की गिरफ्तारी के निर्देश का कांग्रेस पार्टी स्वागत करती है। इस पाखंडी की शीघ्र गिरफ्तारी होनी चाहिये। काली चरण की सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल से साफ है वह भाजपा आरएसएस के गांधी विरोधी और नाथूराम गोंड़से विचारधारा का पोषक है। भारतीय जनता पार्टी उसका उपयोग अपने विध्वंसक और सांप्रदायिक एजेंडे को प्रचारित करने के लिये करती है। कालीचरण अकेला नहीं है, भाजपा ऐसे अनेकों कालीचरणों को पाल पोष कर रखी हुई है।

 

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