देश

इस ईरानी पौधे ने राजस्थान के पाली को किया मालामाल

51views
Share This Post

जयपुर। कंकरीली, पथरीली, हल्की, भारी, लवणीय, क्षारीय, परती, बंजर, अनुपजाऊ और बारानी ज़मीन के लिए शानदार फसल इससे बेहतर और क्या होगी? जिनके पास सिंचाई के साधन कम हैं, और जो बार-बार नयी फसलें लगाने के झंझट से बचना चाहते हैं, उनके लिए मेहंदी का रंग बेजोड़ है.

कम लागत में ज़्यादा कमाई देने वाली मेहंदी के पौधों को एक बार लगाकर सौ साल तक मुनाफा लिया जा सकता है. ये मूलत: ईरानी पौधा है, लेकिन कई अरब देशों के अलावा मिस्र और अफ्रीका में भी पाया जाता है. ये पूरे भारत में मिलता है. बिना पानी एवं सीमित लागत में वर्षाधीन क्षेत्रों में मेहंदी की खेती लाभकारी साबित हो रही है. राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ राज्यों की जलवायु इसकी खेती के लिए अनुकूल है.

पाली में देश का 90 फीसदी उत्पादन

सोजत शहर की उत्पत्ति और उत्पादित भारत की सबसे बड़ी मेहंदी मंडी है. इस क्षेत्र में उत्पादित मेहंदी को दुनिया भर में “राजस्थानी हिना” के रूप में लोकप्रियता मिली है. पाली जिले में मेहंदी का उत्पादन सबसे अधिक होता है. किसान इसकी पत्तियों को सूखे पाउडर के रूप में पैकिंग कर निर्यात करते हैं. सोजत क्षेत्र में लगभग 50-60 कारखाने लगे हुए हैं. इस क्षेत्र में उत्पादित लगभग 90त्न मेहंदी को लगभग 1&0 देशों में निर्यात किया जाता है.

मेहंदी का पूरा पौधा ही है औषधि

आयुर्वेदिक ग्रथों में इसके रोग-निवारक गुणों की महिमा का वर्णन मिलता है. मेहंदी के पत्तों, छाल, फल और बीजों का उपयोग विभिन्न औषधियों के उत्पादन में किया जाता है. इसके फूलों से निचोड़े गये तेल का उपयोग इत्र उद्योग में मेहंदी के ओटो के स्त्रोत के रूप में किया जाता है.

Share This Post

Leave a Response